श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  5.72.92 
अस्मान् वेत्थ परान् वेत्थ वेत्थार्थान् वेत्थ भाषितुम्।
यद् यदस्मद्धितं कृष्ण तत् तद् वाच्य: सुयोधन:॥ ९२॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! आप हमें जानते हैं, कौरवों को भी जानते हैं, हमारे स्वार्थों से भी अनभिज्ञ नहीं हैं और हमें किस प्रकार बात करनी चाहिए, यह भी आप भली-भाँति जानते हैं। अतः जो बात हमारे हित में हो, उसे आप दुर्योधन से कह दीजिए॥ 92॥
 
Shri Krishna! You know us, you know the Kauravas too, you are not unaware of our selfish interests and you also know very well how we should talk. Therefore, whatever is in our interest, you should tell Duryodhan about it.॥ 92॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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