श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  5.72.91 
भ्राता चासि सखा चासि बीभत्सोर्मम च प्रिय:।
सौहृदेनाविशङ्कॺोऽसि स्वस्ति प्राप्नुहि भूतये॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
आप हमारे भाई और मित्र हैं। आप अर्जुन के साथ-साथ मेरे भी प्रिय हैं। आपकी सद्भावना में हमें कोई संदेह नहीं है। अतः दोनों पक्षों के कल्याण के लिए आपको वहाँ जाना चाहिए। आपका कल्याण हो।॥91॥
 
You are our brother and friend. You are loved by Arjuna as well as me. We have no doubt about your goodwill. Therefore, you should go there for the welfare of both sides. May you be blessed.॥91॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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