श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  5.72.90 
विष्वक्सेन कुरून् गत्वा भरताञ्छमय प्रभो।
यथा सर्वे सुमनस: सह स्याम सुचेतस:॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
विश्वक्सेन प्रभु! आप कुरुदेश में जाकर भारतवासियों को शांत कीजिए, जिससे हम सब लोग शुद्ध हृदय और प्रसन्न मन से एक साथ रह सकें॥90॥
 
Vishvaksena Prabhu! You go to Kurudesh and pacify the people of Bharat, so that we all can live together with a pure heart and a happy mind. 90॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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