Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.72.89: युधिष्ठिर ने कहा, "श्रीकृष्ण! आप जो चाहें करें। आपका कल्याण हो। आप सुखपूर्वक कौरवों के पास जाएँ। मुझे आशा है कि आप अपने कार्य में सफल होंगे और सकुशल यहाँ लौटेंगे।" 89   |   mahabharat अध्याय 5.72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  5.72.89 
युधिष्ठिर उवाच
यत् तुभ्यं रोचते कृष्ण स्वस्ति प्राप्नुहि कौरवान्।
कृतार्थं स्वस्तिमन्तं त्वां द्रक्ष्यामि पुनरागतम्॥ ८९॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने कहा, "श्रीकृष्ण! आप जो चाहें करें। आपका कल्याण हो। आप सुखपूर्वक कौरवों के पास जाएँ। मुझे आशा है कि आप अपने कार्य में सफल होंगे और सकुशल यहाँ लौटेंगे।" 89
 
Yudhishthira said, "Shri Krishna! Do whatever you like. May you be blessed. Go to the Kauravas happily. I hope to see you successful in your mission and return here safely." 89
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)