Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.72.88: अतः कुन्तीनन्दन! मेरा वहाँ जाना कभी व्यर्थ नहीं होगा। सम्भव है कि वहाँ हमारा अभीष्ट अर्थ सिद्ध हो जाए और यदि कार्य सिद्ध न भी हो, तो भी हम निन्दा से बच जाएँ। 88॥ | mahabharat अध्याय 5.72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अतः कुन्तीनन्दन! मेरा वहाँ जाना कभी व्यर्थ नहीं होगा। सम्भव है कि वहाँ हमारा अभीष्ट अर्थ सिद्ध हो जाए और यदि कार्य सिद्ध न भी हो, तो भी हम निन्दा से बच जाएँ। 88॥
So Kuntinandan! My going there will never be in vain. It is possible that our desired meaning may be achieved there and even if the work is not accomplished, we will still be saved from condemnation. 88॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥