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mahabharat 5.72.87: यदि वे मेरे साथ किंचित भी अन्याय करेंगे तो मैं उन समस्त कौरवों को जलाकर भस्म कर दूँगा; यह मेरा दृढ़ निश्चय है ॥87॥   |   mahabharat अध्याय 5.72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 87
 
 
श्लोक  5.72.87 
अथ चेत् ते प्रवर्तन्ते मयि किञ्चिदसाम्प्रतम्।
निर्दहेयं कुरून् सर्वानिति मे धीयते मति:॥ ८७॥
 
 
अनुवाद
यदि वे मेरे साथ किंचित भी अन्याय करेंगे तो मैं उन समस्त कौरवों को जलाकर भस्म कर दूँगा; यह मेरा दृढ़ निश्चय है ॥87॥
 
If they behave even slightly unfairly with me, I will burn all those Kauravas to ashes; this is my firm resolve. ॥ 87॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)