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श्लोक 5.72.87  |
अथ चेत् ते प्रवर्तन्ते मयि किञ्चिदसाम्प्रतम्।
निर्दहेयं कुरून् सर्वानिति मे धीयते मति:॥ ८७॥ |
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| अनुवाद |
| यदि वे मेरे साथ किंचित भी अन्याय करेंगे तो मैं उन समस्त कौरवों को जलाकर भस्म कर दूँगा; यह मेरा दृढ़ निश्चय है ॥87॥ |
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| If they behave even slightly unfairly with me, I will burn all those Kauravas to ashes; this is my firm resolve. ॥ 87॥ |
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