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mahabharat 5.72.84: माधव! यदि दुर्योधन छलपूर्वक आपके साथ अनुचित व्यवहार करेगा, तो धन, सुख, दिव्यता और समस्त देवताओं की समृद्धि भी हमें प्रसन्न नहीं कर सकेगी।   |   mahabharat अध्याय 5.72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  5.72.84 
न हि न: प्रीणयेद् द्रव्यं न देवत्वं कुत: सुखम्।
न च सर्वामरैश्वर्यं तव द्रोहेण माधव॥ ८४॥
 
 
अनुवाद
माधव! यदि दुर्योधन छलपूर्वक आपके साथ अनुचित व्यवहार करेगा, तो धन, सुख, दिव्यता और समस्त देवताओं की समृद्धि भी हमें प्रसन्न नहीं कर सकेगी।
 
Madhava! If Duryodhan out of treachery behaves inappropriately with you, then even wealth, pleasure, divinity and the prosperity of all the gods will not be able to please us. 84.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)