श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  5.72.83 
समेतं पार्थिवं क्षत्रं दुर्योधनवशानुगम्।
तेषां मध्यावतरणं तव कृष्ण न रोचये॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
इसके अतिरिक्त इस समय दुर्योधन के अधीन रहनेवाले संसार के समस्त क्षत्रिय वहाँ एकत्र हुए हैं। मुझे तुम्हारा उनके बीच जाना अच्छा नहीं लगता॥ 83॥
 
Besides this, at this time all the Kshatriyas of the world who are under the control of Duryodhan have gathered there. I do not like your going among them.॥ 83॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)