श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  5.72.82 
युधिष्ठिर उवाच
न ममैतन्मतं कृष्ण यत् त्वं याया: कुरून् प्रति।
सुयोधन: सूक्तमपि न करिष्यति ते वच:॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले, "श्रीकृष्ण! मुझे नहीं लगता कि आपको कौरवों के पास जाना चाहिए, क्योंकि दुर्योधन आपकी कही हुई अच्छी बातें भी नहीं सुनेगा।"
 
Yudhishthira said, "Shri Krishna! I do not think that you should go to the Kauravas because Duryodhan will not listen to even the good things you say."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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