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mahabharat 5.72.80: यदि मैं वहां जाकर आपके लाभ में कोई बाधा डाले बिना दोनों पक्षों के बीच संधि करा दूं, तो मैं समझूंगा कि मैंने यह अत्यंत फलदायी और बड़ा पुण्य कार्य कर लिया।'   |   mahabharat अध्याय 5.72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 80
 
 
श्लोक  5.72.80 
शमं तत्र लभेयं चेद् युष्मदर्थमहापयन्।
पुण्यं मे सुमहद् राजंश्चरितं स्यान्महाफलम्॥ ८०॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं वहां जाकर आपके लाभ में कोई बाधा डाले बिना दोनों पक्षों के बीच संधि करा दूं, तो मैं समझूंगा कि मैंने यह अत्यंत फलदायी और बड़ा पुण्य कार्य कर लिया।'
 
If I go there and make a treaty between the two parties without causing any hindrance to your benefit, then I will consider that I have accomplished this very fruitful and huge virtuous act.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)