Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.72.79: वैशम्पायन कहते हैं - 'हे जनमेजय! जब धर्मराज युधिष्ठिर ने ऐसा कहा, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे कहा - 'हे राजन! मैं दोनों पक्षों के हित के लिए कौरवों की सभा में जाऊँगा।'   |   mahabharat अध्याय 5.72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  5.72.79 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त: प्रत्युवाच धर्मराजं जनार्दन:।
उभयोरेव वामर्थे यास्यामि कुरुसंसदम्॥ ७९॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - 'हे जनमेजय! जब धर्मराज युधिष्ठिर ने ऐसा कहा, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनसे कहा - 'हे राजन! मैं दोनों पक्षों के हित के लिए कौरवों की सभा में जाऊँगा।'
 
Vaishmpayana says - 'O Janamejaya! When Dharmaraja Yudhishthira said this, Lord Krishna said to him - 'O King! I will go to the assembly of the Kauravas for the benefit of both the parties.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)