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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप
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श्लोक 78
श्लोक
5.72.78
प्रियश्च प्रियकामश्च गतिज्ञ: सर्वकर्मणाम्।
को हि कृष्णास्ति नस्त्वादृक् सर्वनिश्चयवित् सुहृत्॥ ७८॥
अनुवाद
श्री कृष्ण! आपके समान हमारा प्रिय, हितैषी, सब कर्मों का फल जानने वाला और सब वस्तुओं में निश्चित तत्त्व रखने वाला कौन है? 78॥
Sri Krishna! Who is our beloved, well-wisher, who knows the results of all our actions and who has a definite principle in all things, like you? 78॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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