श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  5.72.76 
तत्र किं मन्यसे कृष्ण प्राप्तकालमनन्तरम्।
कथमर्थाच्च धर्माच्च न हीयेमहि माधव॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
माधव श्रीकृष्ण! ऐसे समय में आप क्या उचित समझते हैं? हमें कैसा आचरण करना चाहिए जिससे हमें धन और धर्म से वंचित न होना पड़े?॥ 76॥
 
Madhava Sri Krishna! What do you think is appropriate in such times? How should we behave so that we do not have to be deprived of wealth and religion?॥ 76॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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