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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप
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श्लोक 75
श्लोक
5.72.75
पुत्रस्नेहश्च बलवान् धृतराष्ट्रस्य माधव।
स पुत्रवशमापन्न: प्रणिपातं प्रहास्यति॥ ७५॥
अनुवाद
माधव! धृतराष्ट्र को अपने पुत्र पर बहुत अधिक आसक्ति है। वह अपने पुत्र के अधीन होने के कारण कभी भी झुकना स्वीकार नहीं करेंगे। 75.
Madhava! Dhritarashtra has a strong attachment towards his son. He will never accept to bow down as he is under the control of his son. 75.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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