श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  5.72.74 
पिता राजा च वृद्धश्च सर्वथा मानमर्हति।
तस्मान्मान्यश्च पूज्यश्च धृतराष्ट्रो जनार्दन॥ ७४॥
 
 
अनुवाद
जनार्दन! पिता, राजा और ज्येष्ठ जन सदैव आदर के पात्र हैं। अतः धृतराष्ट्र हमारे लिए सदैव आदरणीय और पूजनीय हैं।
 
Janardan! Father, king and elders are always worthy of respect. Therefore Dhritarashtra is always respectable and worshipful for us. 74.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)