श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 73
 
 
श्लोक  5.72.73 
सर्वथा त्वेतदुचितं दुर्बलेषु बलीयसाम्।
अनादरोऽविरोधश्च प्रणिपाती हि दुर्बल:॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
यह सर्वथा उचित है कि बलवान को निर्बल के प्रति कोई सम्मान नहीं रखना चाहिए। वे उनका विरोध भी नहीं करते। दुर्बल व्यक्ति वह है जो सदैव झुकने को तैयार रहता है। 73.
 
It is absolutely appropriate that the strong should not have any respect for the weak. They do not even oppose them. The weak person is the one who is always ready to bow down. 73.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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