श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  5.72.70 
प्रतिघातेन सान्त्वस्य दारुणं सम्प्रवर्तते।
तच्छुनामिव सम्पाते पण्डितैरुपलक्षितम्॥ ७०॥
 
 
अनुवाद
जब शांति के प्रयासों में बाधा आती है, तो भयंकर युद्ध स्वतः ही आरंभ हो जाता है। विद्वानों ने इस युद्ध की तुलना कुत्तों के झगड़े से की है। 70.
 
When efforts for peace are obstructed, a terrible war automatically begins. The learned have compared this war to the quarrelling of dogs. 70.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)