श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  5.72.66 
अथवा मूलघातेन द्विषतां मधुसूदन।
फलनिर्वृत्तिरिद्धा स्यात् तन्नृशंसतरं भवेत्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
अथवा शत्रुओं का समूल नाश करके ही अभीष्ट फल की प्राप्ति हो सकती है। परंतु मधुसूदन! यह तो बड़ी क्रूरता होगी। 66।
 
Or the desired result can be achieved only by destroying the enemies completely. But Madhusudan! This would be an act of great cruelty. 66.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)