Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.72.64-65h: (क्योंकि दोनों पक्षों में कोई न कोई कमी ढूँढ़ने की संभावना सदैव बनी रहती है) अतः दोनों पक्षों में से किसी एक का पूर्ण विनाश किए बिना पूर्ण शांति प्राप्त नहीं हो सकती। जो लोग कमी ढूँढ़ते रहते हैं, उनके सामने यह कमी सदैव विद्यमान रहती है। | mahabharat अध्याय 5.72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(क्योंकि दोनों पक्षों में कोई न कोई कमी ढूँढ़ने की संभावना सदैव बनी रहती है) अतः दोनों पक्षों में से किसी एक का पूर्ण विनाश किए बिना पूर्ण शांति प्राप्त नहीं हो सकती। जो लोग कमी ढूँढ़ते रहते हैं, उनके सामने यह कमी सदैव विद्यमान रहती है।
(Because there is always a possibility of finding some loophole in both the sides) Therefore, complete peace cannot be achieved without the complete destruction of one of the two sides. This flaw is always present in front of those who keep looking for loopholes. 64 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥