Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.72.62-63h: अगर कोई इसे लंबे समय तक दबाए भी रखे तो भी नफरत की आग को पूरी तरह से नहीं बुझा सकता क्योंकि अगर उस परिवार में कोई अभी भी जीवित है तो ऐसे कई लोग हैं जो उसके पहले घटी घटनाओं के बारे में बताते हैं जिससे नफरत बढ़ गई। | mahabharat अध्याय 5.72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न हि वैराणि शाम्यन्ति दीर्घकालधृतान्यपि॥ ६२॥
आख्यातारश्च विद्यन्ते पुमांश्चेद् विद्यते कुले।
अनुवाद
अगर कोई इसे लंबे समय तक दबाए भी रखे तो भी नफरत की आग को पूरी तरह से नहीं बुझा सकता क्योंकि अगर उस परिवार में कोई अभी भी जीवित है तो ऐसे कई लोग हैं जो उसके पहले घटी घटनाओं के बारे में बताते हैं जिससे नफरत बढ़ गई।
Even if one keeps it suppressed for a long time, the fire of hatred cannot be extinguished completely because if someone is still alive in that family, then there are many people who tell about the incidents that happened before him which increased the hatred.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥