श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 61-62h
 
 
श्लोक  5.72.61-62h 
उत्सादयति य: सर्वं यशसा स विमुच्यते॥ ६१॥
अकीर्तिं सर्वभूतेषु शाश्वतीं सोऽधिगच्छति।
 
 
अनुवाद
जो शत्रु के कुल के सभी बालकों और वृद्धों का वध करता है, वह वीर यश से वंचित हो जाता है। वह समस्त प्राणियों में सदा अपकीर्ति का पात्र होता है। 61 1/2॥
 
He who kills all the young and old men in the enemy's clan is deprived of heroic fame. He is the subject of ever-lasting infamy (slander) among all living beings. 61 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)