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mahabharat 5.72.56-57: जो वीर, शीलवान, कुलीन और दयालु होते हैं, वे प्रायः युद्ध में मारे जाते हैं और नीच लोग बच जाते हैं। हे जनार्दन! शत्रुओं को मारकर भी उनके लिए मन में सदैव पश्चाताप बना रहता है। 56-57।   |   mahabharat अध्याय 5.72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 56-57
 
 
श्लोक  5.72.56-57 
ये ह्येव धीरा ह्रीमन्त आर्या: करुणवेदिन:॥ ५६॥
त एव युद्धे हन्यन्ते यवीयान् मुच्यते जन:।
हत्वाप्यनुशयो नित्यं परानपि जनार्दन॥ ५७॥
 
 
अनुवाद
जो वीर, शीलवान, कुलीन और दयालु होते हैं, वे प्रायः युद्ध में मारे जाते हैं और नीच लोग बच जाते हैं। हे जनार्दन! शत्रुओं को मारकर भी उनके लिए मन में सदैव पश्चाताप बना रहता है। 56-57।
 
Those who are brave, modest, noble and compassionate are usually killed in wars and the lowly people survive. O Janardan! Even after killing the enemies, there is always remorse in the mind for them. 56-57.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)