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mahabharat 5.72.52: न तो किसी पक्ष की कहीं विजय देखी गई है और न ही पराजय। हाँ, दोनों के धन और ऐश्वर्य का नाश अवश्य देखा गया है। यदि कोई पक्ष पीठ दिखाकर भाग जाए, तो उसे भी धन और जन दोनों की हानि उठानी पड़ती है।   |   mahabharat अध्याय 5.72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  5.72.52 
जयो नैवोभयोर्दृष्टो नोभयोश्च पराजय:।
तथैवापचयो दृष्टो व्यपयाने क्षयव्ययौ॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
न तो किसी पक्ष की कहीं विजय देखी गई है और न ही पराजय। हाँ, दोनों के धन और ऐश्वर्य का नाश अवश्य देखा गया है। यदि कोई पक्ष पीठ दिखाकर भाग जाए, तो उसे भी धन और जन दोनों की हानि उठानी पड़ती है।
 
Neither has victory been seen anywhere for either side nor has defeat been witnessed. Yes, the destruction of wealth and prosperity of both has certainly been seen. If any side turns its back and runs away, then it too has to bear the loss of both wealth and people. 52.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)