श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  5.72.51 
एको ह्यपि बहून् हन्ति घ्नन्त्येकं बहवोऽप्युत।
शूरं कापुरुषो हन्ति अयशस्वी यशस्विनम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में एक ही योद्धा अनेक सैनिकों को मार सकता है और अनेक योद्धा मिलकर भी एक ही को मार सकते हैं। कभी-कभी कायर वीर को मार डालता है और कभी-कभी कुख्यात व्यक्ति प्रसिद्ध योद्धा को परास्त कर देता है॥ 51॥
 
In a war even a single warrior can kill many soldiers and even if many warriors come together they can kill only one. Sometimes a coward kills a brave man and an infamous man defeats a famous warrior.॥ 51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)