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श्लोक 5.72.43  |
तत्रैषा परमा काष्ठा रौद्रकर्मक्षयोदया।
यद् वयं कौरवान् हत्वा तानि राष्ट्राण्यवाप्नुम:॥ ४३॥ |
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| अनुवाद |
| दूसरा उपाय यह है कि हम कौरवों को मारकर सम्पूर्ण राज्य पर अधिकार कर लें; परन्तु यह तो घोर क्रूरता की पराकाष्ठा होगी (क्योंकि इस स्थिति में तो हम बहुत से निरपराध लोगों को मारकर ही विजयी होंगे)।॥ 43॥ |
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| The other option is that we kill the Kauravas and take over the entire kingdom; but this would be the height of a horrific act of cruelty (because in this case we will be victorious only after killing many innocent people).॥ 43॥ |
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