श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  5.72.42 
तत्र न: प्रथम: कल्पो यद् वयं ते च माधव।
प्रशान्ता: समभूताश्च श्रियं तामश्नुवीमहि॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
माधव! इस विषय में हमारा प्रथम उद्देश्य यही है कि हम और कौरव परस्पर सन्धि करके शान्तिपूर्वक रहें और उस धन का समान रूप से उपभोग करें ॥ 42॥
 
Madhava! Our first aim in this matter is that we and the Kauravas should enter into a treaty with each other and live in peace and enjoy that wealth equally. ॥ 42॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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