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श्री महाभारत
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पर्व 5: उद्योग पर्व
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अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप
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श्लोक 40
श्लोक
5.72.40
तदिदं मयि ते दृष्टं प्रत्यक्षं मधुसूदन।
यथा राज्यात् परिभ्रष्टो वसामि वसतीरिमा:॥ ४०॥
अनुवाद
मधुसूदन! आपने स्वयं ही देख लिया है कि मैं किस प्रकार राज्य से निकाला गया और इन दिनों कितने कष्टों में जी रहा हूँ ॥40॥
Madhusudan! You have seen it all yourself, how I was ousted from the kingdom and how much suffering I am living with these days. ॥ 40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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