श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  5.72.39 
ह्रीमानवति देवांश्च पितॄनात्मानमेव च।
तेनामृतत्वं व्रजति सा काष्ठा पुण्यकर्मणाम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
शीलवान मनुष्य देवताओं, अपने पूर्वजों और अपनी रक्षा करता है। ऐसा करके वह अमरता प्राप्त करता है। यही पुण्यात्मा पुरुषों का परम लक्ष्य है। 39.
 
A modest man protects the gods, his ancestors and himself. By doing this he achieves immortality. That is the ultimate goal of virtuous men. 39.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd