श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.72.38 
अह्रीको वा विमूढो वा नैव स्त्री न पुन: पुमान्।
नास्याधिकारो धर्मेऽस्ति यथा शूद्रस्तथैव स:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
जो निर्लज्ज या मूर्ख है, वह न तो स्त्री है और न ही पुरुष। उसे धार्मिक कार्य करने का कोई अधिकार नहीं है। वह शूद्र के समान है। 38.
 
One who is shameless or foolish is neither a woman nor a man. He has no right to perform religious duties. He is like a Shudra. 38.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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