न चास्य सर्वशास्त्राणि प्रभवन्ति निबर्हणे।
सोऽभिक्रुध्यति भृत्यानां सुहृदश्चाभ्यसूयति॥ ३१॥
अनुवाद
उस समय समस्त शास्त्र भी उसके संकट को दूर करने में समर्थ नहीं होते। वह अपने सेवकों पर क्रोध करता है और अपने सम्बन्धियों में दोष ढूँढ़ने लगता है ॥31॥
At that time even all the scriptures are not capable of averting his trouble. He becomes angry at his servants and starts finding faults in his relatives. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥