श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.72.28 
यदस्य धर्म्यं मरणं शाश्वतं लोकवर्त्म तत्।
समन्तात् सर्वभूतानां न तदत्येति कश्चन॥ २८॥
 
 
अनुवाद
धर्मानुसार मनुष्य की मृत्यु ही परलोक जाने का सनातन मार्ग है। समस्त प्राणियों में कोई भी उस मृत्यु का किसी भी प्रकार उल्लंघन नहीं कर सकता।॥28॥
 
The death of a man in accordance with Dharma is the eternal path to the next world. Among all living beings, no one can violate that death in any way.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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