श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.72.26 
उन्मादमेके पुष्यन्ति यान्त्यन्ये द्विषतां वशम्।
दास्यमेके च गच्छन्ति परेषामर्थहेतुना॥ २६॥
 
 
अनुवाद
बहुत से लोग पागल हो जाते हैं, बहुत से शत्रुओं के चंगुल में फँस जाते हैं और बहुत से लोग धन के लिए दूसरों की गुलामी स्वीकार कर लेते हैं ॥ 26॥
 
Many people become insane, many fall into the clutches of enemies and many people accept slavery to others for money.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)