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श्लोक 5.72.25  |
एतामवस्थां प्राप्यैके मरणं वव्रिरे जना:।
ग्रामायैके वनायैके नाशायैके प्रवव्रजु:॥ २५॥ |
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| अनुवाद |
| इस दीन अवस्था में पहुँचकर कितने ही लोगों ने मृत्यु को चुन लिया है। कितने ही लोग अपना गाँव छोड़कर दूसरे गाँव में बस गए हैं, कितने ही जंगल में चले गए हैं और कितने ही लोग अपना घर छोड़कर प्राण त्यागने को चले गए हैं॥ 25॥ |
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| On reaching this poor state, many people have chosen death. Some people have left their village and settled in another village, many have gone to the jungles and many people have left their homes to give up their lives.॥ 25॥ |
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