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ये धनादपकर्षन्ति नरं स्वबलमास्थिता:।
ते धर्ममर्थं कामं च प्रमथ्नन्ति नरं च तम्॥ २४॥
अनुवाद
जो लोग अपने बल के मद में चूर होकर किसी को धन से वंचित करते हैं, वे न केवल उसके धर्म, अर्थ और काम का नाश करते हैं, अपितु उस व्यक्ति का भी नाश करते हैं।
Those who, being confident of their own power, deprive a person of wealth, not only destroy his Dharma, Artha and Kama (desire), but they destroy that person also. 24.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥