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mahabharat 5.72.23: धन को उत्तम धर्म की प्राप्ति का साधन बताया गया है। धन में ही सब कुछ स्थित है। इस संसार में केवल धनवान ही जीवित रहते हैं। जो दरिद्र हैं, वे मृत समान हैं॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 5.72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  5.72.23 
धनमाहु: परं धर्मं धने सर्वं प्रतिष्ठितम्।
जीवन्ति धनिनो लोके मृता ये त्वधना नरा:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
धन को उत्तम धर्म की प्राप्ति का साधन बताया गया है। धन में ही सब कुछ स्थित है। इस संसार में केवल धनवान ही जीवित रहते हैं। जो दरिद्र हैं, वे मृत समान हैं॥ 23॥
 
Wealth has been described as the means of attaining the best religion. Everything is established in wealth. Only the rich people survive in this world. Those who are poor are as good as dead.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)