श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.72.19 
ह्रीर्हता बाधते धर्मं धर्मो हन्ति हत: श्रियम्।
श्रीर्हता पुरुषं हन्ति पुरुषस्याधनं वध:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
नष्ट हुआ शील धर्म का नाश कर देता है। नष्ट हुआ धर्म मनुष्य के धन का नाश कर देता है और नष्ट हुआ धन उस मनुष्य का नाश कर देता है, क्योंकि धन का अभाव ही मनुष्य की मृत्यु है ॥19॥
 
Destroyed modesty destroys religion. Destroyed religion destroys a man's wealth and destroyed wealth ruins that man, because lack of wealth is the death of a man. ॥19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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