Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.72.18: यदि कोई मनुष्य कुलीन कुल में उत्पन्न होकर वृद्ध होने पर भी दूसरों का धन हड़पना चाहे, तो वह लोभ उसकी विचारशक्ति को नष्ट कर देता है। विचारशक्ति के नष्ट हो जाने पर वह शील को भी नष्ट कर देता है॥18॥ | mahabharat अध्याय 5.72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यदि कोई मनुष्य कुलीन कुल में उत्पन्न होकर वृद्ध होने पर भी दूसरों का धन हड़पना चाहे, तो वह लोभ उसकी विचारशक्ति को नष्ट कर देता है। विचारशक्ति के नष्ट हो जाने पर वह शील को भी नष्ट कर देता है॥18॥
If a man, born in a noble family and even after growing old, wants to take the wealth of others, then that greed destroys his thinking power. When the thinking power is destroyed, it also destroys his modesty.॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥