श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  5.72.15-16 
अविस्थलं वृकस्थलं माकन्दी वारणावतम्।
अवसानं च गोविन्द कञ्चिदेवात्र पञ्चमम्॥ १५॥
पञ्च नस्तात दीयन्तां ग्रामा वा नगराणि वा।
वसेम सहिता येषु मा च नो भरता नशन्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
गोविन्द! मैंने धृतराष्ट्र से कहा था कि हे भाई! कृपा करके हमें अविस्थल, वृकस्थल, माकन्दी, वारणावत और पाँचवाँ गाँव, जो भी आप चाहें, दे दीजिए। इस प्रकार हमें पाँच गाँव या नगर दीजिए; जहाँ हम पाँचों भाई एक साथ रह सकें और हमारे कारण भरतवंशियों का नाश न हो॥ 15-16॥
 
Govind! I had told Dhritarashtra that dear brother, please give us Avisthal, Vrikasthal, Makandi, Varanavat and the fifth village whichever you want. In this way give us five villages or cities; where we five brothers can live together and the Bharatvanshis should not be destroyed because of us.॥ 15-16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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