श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.72.14 
काशिभिश्चेदिपञ्चालैर्मत्स्यैश्च मधुसूदन।
भवता चैव नाथेन पञ्च ग्रामा वृता मया॥ १४॥
 
 
अनुवाद
मधुसूदन! यद्यपि काशी, चेदि, पांचाल और मत्स्यदेश के वीर योद्धा हमारे समर्थक हैं और आप हमारे रक्षक और स्वामी हैं; (आपकी सहायता से हम सम्पूर्ण राज्य पर अधिकार कर सकते हैं) तथापि मैंने केवल पाँच गाँव ही माँगे हैं॥ 14॥
 
Madhusudan! Although the brave warriors of Kasi, Chedi, Panchala and Matsyadesh are our supporters and you are our protector and lord; (with your help we can take over the whole kingdom) yet I have asked for only five villages.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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