Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.72.11: परन्तु राजा धृतराष्ट्र लोभ में डूबे हुए हैं। वे अपने धर्म की ओर ध्यान नहीं देते। अपने पुत्रों में आसक्त होकर तथा सदैव उनके अधीन रहकर, वे अपने मूर्ख पुत्र दुर्योधन की आज्ञा का पालन करते हैं। ॥11॥ | mahabharat अध्याय 5.72: युधिष्ठिरका श्रीकृष्णसे अपना अभिप्राय निवेदन करना, श्रीकृष्णका शान्तिदूत बनकर कौरवसभामें जानेके लिये उद्यत होना और इस विषयमें उन दोनोंका वार्तालाप । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गृद्धो राजा धृतराष्ट्र: स्वधर्मं नानुपश्यति।
वश्यत्वात् पुत्रगृद्धित्वान्मन्दस्यान्वेति शासनम्॥ ११॥
अनुवाद
परन्तु राजा धृतराष्ट्र लोभ में डूबे हुए हैं। वे अपने धर्म की ओर ध्यान नहीं देते। अपने पुत्रों में आसक्त होकर तथा सदैव उनके अधीन रहकर, वे अपने मूर्ख पुत्र दुर्योधन की आज्ञा का पालन करते हैं। ॥11॥
But King Dhritarashtra is drowned in greed. He does not look at his Dharma. Being attached to his sons and always being under their control, he follows the orders of his foolish son Duryodhan. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥