श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 70: भगवान‍् श्रीकृष्णके विभिन्न नामोंकी व्युत्पत्तियोंका कथन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.70.15 
एवंविधो धर्मनित्यो भगवान‍् मधुसूदन:।
आगन्ता हि महाबाहुरानृशंस्यार्थमच्युत:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
ऐसा ही भगवान मधुसूदन का स्वरूप है, जो सदैव धर्म में तत्पर रहते हैं। वे पराक्रमी श्रीकृष्ण, जो अपनी मर्यादा से कभी विचलित नहीं होते, कौरवों पर दया करने के लिए यहाँ आ रहे हैं।॥15॥
 
Such is the form of Lord Madhusudan who is always devoted to Dharma. The powerful Sri Krishna who never deviates from his dignity is coming here to show mercy to the Kauravas. ॥ 15॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि यानसंधिपर्वणि संजयवाक्ये सप्ततितमोऽध्याय:॥ ७०॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत यानसंधिपर्वमें संजयवाक्यविषयक सत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७०॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)