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mahabharat 5.70.11-12h: वे सर्वत्र विद्यमान हैं और सबमें निवास करते हैं, इसलिए वे 'पुरुष' हैं और सब मनुष्यों में श्रेष्ठ होने के कारण 'पुरुषोत्तम' कहलाते हैं। वे सत् और असत्, सबकी उत्पत्ति और प्रलय के स्थान हैं और उन सबका सदैव ज्ञान रखते हैं, इसलिए वे 'सर्व' कहलाते हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.70: भगवान‍् श्रीकृष्णके विभिन्न नामोंकी व्युत्पत्तियोंका कथन   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 70: भगवान‍् श्रीकृष्णके विभिन्न नामोंकी व्युत्पत्तियोंका कथन  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  5.70.11-12h 
पूरणात् सदनाच्चापि ततोऽसौ पुरुषोत्तम:।
असतश्च सतश्चैव सर्वस्य प्रभवाप्ययात्॥ ११॥
सर्वस्य च सदा ज्ञानात् सर्वमेतं प्रचक्षते।
 
 
अनुवाद
वे सर्वत्र विद्यमान हैं और सबमें निवास करते हैं, इसलिए वे 'पुरुष' हैं और सब मनुष्यों में श्रेष्ठ होने के कारण 'पुरुषोत्तम' कहलाते हैं। वे सत् और असत्, सबकी उत्पत्ति और प्रलय के स्थान हैं और उन सबका सदैव ज्ञान रखते हैं, इसलिए वे 'सर्व' कहलाते हैं।
 
He is present everywhere and is the abode of all, therefore he is the 'Purusha' and being the best among all men, he is called 'Purushottam'. He is the place of origin and dissolution of all, the real and the unreal, and always has knowledge of all of them; therefore he is called 'Sarva'. 11 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)