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स श्रुत्वा माधवं यान्तं सदश्वैरनिलोपमै:।
बलेन नातिमहता द्वारकामभ्ययात् पुरीम्॥ ५॥
अनुवाद
जब उसने सुना कि श्रीकृष्ण विराटनगर से द्वारका जा रहे हैं, तो वह पवन के समान वेगवान उत्तम घोड़ों और एक छोटी सी सेना के साथ द्वारकापुरी की ओर चल पड़ा।
When he heard that Sri Krishna was going to Dwarka from Viratnagar, he set out towards Dwarkapuri with excellent horses as fast as the wind and a small army.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥