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mahabharat 5.7.29: इसलिए श्रीकृष्ण को देखकर मैं मन ही मन इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि मैं न तो अर्जुन की सहायता करूंगा और न ही दुर्योधन की।   |   mahabharat अध्याय 5.7: श्रीकृष्णका दुर्योधन तथा अर्जुन दोनोंको सहायता देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 7: श्रीकृष्णका दुर्योधन तथा अर्जुन दोनोंको सहायता देना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.7.29 
नाहं सहाय: पार्थस्य नापि दुर्योधनस्य वै।
इति मे निश्चिता बुद्धिर्वासुदेवमवेक्ष्य ह॥ २९॥
 
 
अनुवाद
इसलिए श्रीकृष्ण को देखकर मैं मन ही मन इस निष्कर्ष पर पहुंचा हूं कि मैं न तो अर्जुन की सहायता करूंगा और न ही दुर्योधन की।
 
Therefore, after looking at Sri Krishna, I have come to the conclusion in my mind that I will neither help Arjuna nor Duryodhan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)