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mahabharat 5.7.10-11: जागने पर वृष्णिकुलभूषण धारण किए भगवान कृष्ण ने सबसे पहले अर्जुन को देखा। मधुसूदन ने दोनों का यथोचित आदर-सत्कार किया और उनके आने का कारण पूछा। तब दुर्योधन ने हँसते हुए भगवान कृष्ण से कहा -   |   mahabharat अध्याय 5.7: श्रीकृष्णका दुर्योधन तथा अर्जुन दोनोंको सहायता देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 7: श्रीकृष्णका दुर्योधन तथा अर्जुन दोनोंको सहायता देना  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  5.7.10-11 
प्रतिबुद्ध: स वार्ष्णेयो ददर्शाग्रे किरीटिनम्।
स तयो: स्वागतं कृत्वा यथावत् प्रतिपूज्य तौ॥ १०॥
तदागमनजं हेतुं पप्रच्छ मधुसूदन:।
ततो दुर्योधन: कृष्णमुवाच प्रहसन्निव॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जागने पर वृष्णिकुलभूषण धारण किए भगवान कृष्ण ने सबसे पहले अर्जुन को देखा। मधुसूदन ने दोनों का यथोचित आदर-सत्कार किया और उनके आने का कारण पूछा। तब दुर्योधन ने हँसते हुए भगवान कृष्ण से कहा -
 
On waking up, Lord Krishna wearing Vrishnikulabhushan saw Arjun first. Madhusudan honored both of them with due respect and asked them the reason for their arrival. Then Duryodhana laughingly said to Lord Krishna –
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)