श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 69: संजयका धृतराष्ट्रको श्रीकृष्ण-प्राप्ति एवं तत्त्वज्ञानका साधन बताना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.69.7 
दुर्योधन उवाच
भगवान‍् देवकीपुत्रो लोकांश्चेन्निहनिष्यति।
प्रवदन्नर्जुने सख्यं नाहं गच्छेऽद्य केशवम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
दुर्योधन ने कहा-पिताजी! ऐसा माना जाता है कि देवकीनन्दन श्रीकृष्ण साक्षात भगवान हैं और वे इच्छानुसार सम्पूर्ण जगत् का विनाश कर सकते हैं, फिर भी वे अपने को अर्जुन का मित्र कहते हैं; अतः अब मैं उनकी शरण नहीं जाऊँगा॥7॥
 
Duryodhana said – Father! It is believed that Devkinandan Shri Krishna is God in person and he can destroy the entire world as soon as he wishes, yet he calls himself a friend of Arjuna; Therefore, now I will not seek refuge in them. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)