श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 69: संजयका धृतराष्ट्रको श्रीकृष्ण-प्राप्ति एवं तत्त्वज्ञानका साधन बताना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.69.4 
धृतराष्ट्र उवाच
गावल्गणेऽत्र का भक्तिर्या ते नित्या जनार्दने।
यया त्वमभिजानासि त्रियुगं मधुसूदनम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा- संजय! भगवान श्रीकृष्ण के प्रति तुम्हारी नित्य भक्ति का स्वरूप क्या है? जिसके द्वारा तुम त्रियुगरूपी भगवान मधुसूदन का तत्त्व जानते हो॥4॥
 
Dhritarashtra asked- Sanjay! What is the nature of your daily devotion to Lord Krishna? Through which you know the essence of Lord Madhusudan in the form of Triyuga. 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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