श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 69: संजयका धृतराष्ट्रको श्रीकृष्ण-प्राप्ति एवं तत्त्वज्ञानका साधन बताना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.69.3 
विद्यया तात जानामि त्रियुगं मधुसूदनम्।
कर्तारमकृतं देवं भूतानां प्रभवाप्ययम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे पिता! मैं ज्ञान-दृष्टि से भगवान मधुसूदन को जानता हूँ, जो तीनों युगों के स्वरूप हैं और जो सम्पूर्ण प्राणियों के रचयिता और संहारक हैं तथा जो सबके कर्ता हैं, परन्तु किसी के कार्य नहीं हैं॥3॥
 
O father! With the vision of knowledge, I know Lord Madhusudan, who is the form of the three ages and who is the creator and destroyer of all beings and who is the doer of all but is not the work of anyone. ॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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