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mahabharat 5.69.20: इन्द्रियों को दृढ़तापूर्वक वश में रखना चाहिए। विद्वान ब्राह्मण इसी को ज्ञान मानते हैं। यही ज्ञान वह मार्ग है जिस पर बुद्धिमान पुरुष चलते हैं। 20॥   |   mahabharat अध्याय 5.69: संजयका धृतराष्ट्रको श्रीकृष्ण-प्राप्ति एवं तत्त्वज्ञानका साधन बताना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 69: संजयका धृतराष्ट्रको श्रीकृष्ण-प्राप्ति एवं तत्त्वज्ञानका साधन बताना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  5.69.20 
एतज्ज्ञानं विदुर्विप्रा ध्रुवमिन्द्रियधारणम्।
एतज्ज्ञानं च पन्थाश्च येन यान्ति मनीषिण:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इन्द्रियों को दृढ़तापूर्वक वश में रखना चाहिए। विद्वान ब्राह्मण इसी को ज्ञान मानते हैं। यही ज्ञान वह मार्ग है जिस पर बुद्धिमान पुरुष चलते हैं। 20॥
 
The senses should be kept firmly under control. Learned Brahmins consider this as knowledge. This knowledge is the path on which wise men walk. 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)