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mahabharat 5.69.2: संजय ने कहा, "हे राजन! सुनिए, आपको सच्चे ज्ञान का अधिकार नहीं है और मेरी ज्ञान-दृष्टि कभी क्षीण नहीं होती। जो सच्चे ज्ञान के अधिकार से रहित है और जिसकी बुद्धि अज्ञानरूपी अंधकार से नष्ट हो गई है, वह मनुष्य श्रीकृष्ण के वास्तविक स्वरूप को नहीं जान सकता॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 5.69: संजयका धृतराष्ट्रको श्रीकृष्ण-प्राप्ति एवं तत्त्वज्ञानका साधन बताना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 69: संजयका धृतराष्ट्रको श्रीकृष्ण-प्राप्ति एवं तत्त्वज्ञानका साधन बताना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.69.2 
संजय उवाच
शृणु राजन् न ते विद्या मम विद्या न हीयते।
विद्याहीनस्तमोध्वस्तो नाभिजानाति केशवम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा, "हे राजन! सुनिए, आपको सच्चे ज्ञान का अधिकार नहीं है और मेरी ज्ञान-दृष्टि कभी क्षीण नहीं होती। जो सच्चे ज्ञान के अधिकार से रहित है और जिसकी बुद्धि अज्ञानरूपी अंधकार से नष्ट हो गई है, वह मनुष्य श्रीकृष्ण के वास्तविक स्वरूप को नहीं जान सकता॥ 2॥
 
Sanjaya said, "O King! Listen, you do not have the right to the true knowledge and my vision of knowledge never fades. A person who is devoid of the right to the true knowledge and whose intellect has been destroyed by the darkness of ignorance cannot know the real form of Shri Krishna.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)